राष्ट्रवाद का सच, भारत माता की …!

राष्ट्रवाद का सच
भारत माता की …! 15 अगस्त बीत गया है, आज़ादी के 63 साल बीत गए हैं, लेकिन हम लकीर के फकीर, वहीँ के वहीँ है|  फिल्मो में, किताबो में , और बुद्धिजीवियों ने कहा है – “देश तभी सुधेरेगा जब तुम अपने आप को सुधारोगे, हर व्यक्ति अगर सरकार के भरोसे बैठ जाये या किसी चमत्कार का इंतेजार करे तो उद्धार नहीं हो सकता”|  अबे बेहेनचोद – अगर हर individual अपनी responsibility समझने लग जाये  तो जनता को सरकार की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, किसी क़ानून व्यवस्था की जरूरत नहीं पड़ेगी| में तो कहता हूँ की इस country को हिटलर जैसे dictator की जरूरत है, जो अपनी तानाशाही से अपने monarch  को बनाये और सबकी माँ चोद के responsibility  का पाठ पढाये|  इस फटी चुद वाली सरकार और कानून व्यवस्था की औकात नहीं है की वो किसी का भला कर सके| ये सारे बेटिचोद राजनेता सरकार नाम की रापचिक रंडी के दलाल हैं, और महा-मादरचोद व्यापारी इन दलालों की मदद से सरकार को चोद रहे हैं, अब नौबत ये है की सरकार की चुद फट गयी है पर इन महा-मादरचोद व्यापारियों का लंड अभी ठंडा नहीं हुआ हैं, और अब ये उस फटी चुद को तो मार ही रहे है और साथ-ही-साथ सरकार की गांड भी मार रहे है, व्यापारी आगे से और राजनेता पीछे से, double penetration हो रहा है| अब तो भारत में capitalist  और politician लोगो का ही राज हो गया है|  और आम जनता अपनी माँ चुदा रही है, एक गौर करने वाली बात है – भारत को भारत माता क्यों कहा गया है, भारत पिता क्यों नहीं?, अबे चूतियों, अगर भारत को माँ नहीं बोलोगे तो चोदने को कैसे मिलेगा, तो अब मतलब ये निकलता है की भारत हो गयी माँ और गाँधी हो गया भारत का पिता, पर गाँधी का तो लंड खड़ा नहीं होता था, तो ये capitalist और politician लोग भारत माता को चोद रहे हैं और उस हरम की हरामी औलादें भारत की जनता कहलाती है, और ये जनता 30 करोड़ से 1 अरब हो गयी है, पिछले 63 सालों में इन capitalist और politician लोगों ने भारत माता की खूब चूत मारी है| अब इस भारत को कोई individual effort, क्रांति, humanitarian work या भलाई से ठीक नहीं किया जा सकता , इसके लिए dictatorship या marshal law का होना जरूरी है|  बाबा रामदेव ने भी कहा है की अंग्रेज कानून व्यवस्था तो भारतियों का शोषण करने और उनपे आत्याचार करने के लिए बनाई गयी थी, अब भारत के चूतियों ने उसी कानून व्यवस्था को जरी रखा, सारे चूतियों में no 1 था भीमराव चुतिया आंबेडकर जिसने अपनी अकल नहीं लगायी और भारत की चुतिया जुगाड़ technology से copy paste करतें हुए भारत का 80 % संविधान अंग्रेज संविधान से चोरी कर लिया, उस चूतिये को नहीं मालूम था की अंग्रेजो की हर चीज भारतीयों की माँ चोदने के लिए बनाई है| में तो अंग्रेजो की बुद्धि का लोहा मानता हूँ , ये बेटिचोद अंग्रेज बहुत काबिल और दुनिया के सबसे बुद्धिजीवियों में गिने जाने वाले मनुष्य है, आधी से ज्यादा दुनिया की माँ चोद रखी थी, सबसे powerful nation अमेरिका भी कभी अंग्रेजो से गांड मरा चूका है|  अब हरम की ये औलादें बड़ी और व्यस्क हो चुकी हैं, और इनकी समझ में आ गया है की ये सब उन capitalist और politician लोगों की अवैध संताने हैं, ये हरम की औलादें आज-कल नक्सली के नाम से जानी जाती हैं | इन नक्सलियों की बुद्धि भी कम है, इन्हें public property नष्ट करने की बजाए, अपने ठरकी बापों की गांड मारनी चाहिए, anti-infantry या anti-tank mine से पुलिस वालों को मारने से कुछ नहीं होगा, इन्हें तो capitalist और politician लोगों के हाँथ और पैर काट कर दुनिया में गांड मरवाने के लिए छोड़ देना चाहिए | संसार में अपंग होकर जीने से इन मादरचोदो की अकल ठिकाने आ जाएगी|  ये एक और दूसरा उपाय है जो की भारत को developing से developed country की श्रेणी में ला देगा| पूंजीवादियों के खिलाफ बनी एक movie है जो की मुंबई का सच बयां करती हैं, “CITY  OF  GOLD” – महेश मन्झरेकर की बनाई मूवी है जो ये दिखाती हैं की किस तरह capitalist लोगो ने निचले तपके के लोगो का शोषण किया, और अपना काम निकल जाने पर उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया, अंडर-वर्ल्ड के बनने का भी यहीं कारण था, जब labor class लोगो की रोटी का इन्तेजाम नहीं हो रहा था तब इन अनपढ़ गंवार लोगो ने इन पूंजीवादियों की कनपट्टी पर बन्दूक रख कर इनकी गांड से पैसा निकालना शुरू कर दिया|

About looosser

I m a life long looser, my birth is for getting fu@ked by others, and to accept all kinda humiliation. Since my birth i m striving a lot to overcome humiliation, stupidity , dumb ass, moroness. I talked to a astrologer, he told me that I will be getting something only if i put effort more than a avg. person does, I have to strive more as compared to avg. men, I will not be able to enjoy my life to live it fully because of the grief, pain and disappointment of failed efforts, I have to put more efforts than a usual men does to achieve something in life. and there will always be a delay in small successes. Now I m fed up with those huge delays and I have accepted that I m in this world to suffer a lot, even i haven't done anything wrong, or wrong to anyone. I m all f@c-ked up. I need to release my body as it is causing much of pain, specially the mental stress.
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