ब्राम्हणों और चमारों में कोई अंतर नहीं है, है तो बस ज्यादा और कम बुद्धिजीवी होने का|

ब्राम्हणों और चमारों में कोई अंतर नहीं है, है तो बस ज्यादा और कम बुद्धिजीवी होने का|
ब्राम्हणों की माँ का चुद | सब ब्राम्हण मादरचोद होते हैं| ब्राम्हण साले इतने मादरचोद हैं की अपनी विरासत में मिली बुद्धि को कायम रखने के लिए ये बेटिचोद अपने ही कौम और बिरादरी में शादी करते हैं| इन्ही मादरचोद ब्राम्हणों ने ये समुदायवाद बनाया है, क्योंकि ये सबपे राज करना चाहते हैं| पृथ्वी की शुरुवात से ही कुछ बुद्दिजीवियों ने कम बुद्धि वाले मनुष्यों को गुलाम बनाने के लिए लोगो का वर्गीकरण कर दिया|  अब ये बुद्धिजीव अपने आप को ब्राम्हण कहलाने लगे, वर्ण और भेदभाव यहीं से चालू हुआ है | जो कम बुद्धि का मनुष्य है उससे ये अपनी गांड धुलवाने लगे और उसे जमादार का खिताब दे दिया |  अब भला कम बुद्धि का होना किसी मनुष्य की गलती नहीं है, वो तो बेचारा गांड मरवाने के लिए पैदा हो गया है, ये तो उस महा मादरचोद supreme power का किया धरा है, जिसने की ये दुनिया बनाई है | वो महा मादरचोद supreme power  किसी को निचे आकर कुछ नहीं बताता है, सब कुछ, सारा राज़ उसने अपनी गांड में दाल रखा है| ये मादरचोद मनुष्य जो अपने आप को ब्राम्हण बताते हैं इन्हें भी नहीं मालूम की ये सब उस महा मादरचोद supreme power  से गांड मरवाने के लिए दुनिया में आये हैं, फिर भी ये साले चूतिये समुदायवाद और वर्ण भेद का गन्दा खेल खेल रहे हैं| अब भला जो चमारों में पैदा हुआ है उसका क्या कुसूर हैं, ये तो उसकी choice  नहीं थी की वो चमारों में पैदा हो |  ये तो ब्राम्हणों का good  luck  सौभाग्य है की वो ब्राम्हणों में पैदा हुए है, फिर भी ये मादरचोद चौड़े होते रहते हैं| अब बेहेन्चोद, तुम कहोगे की ये तो कर्मो का फल है, अबे चूतिये, कभी अपनी अकल लगाई है, माँ-बाप, दादा-परदादा यही राग अलापते रहे और तुम जैसे कम बुद्धि वाले चूतिये को भी यही सिखा गए, कर्मो का फल, माँ की चुत| किस कर्म का फल? जो किसी दूसरे शरीर ने पिछले जनम में किया ! (अगर हम जन्म जन्मान्तर में विस्वाश करे तो ) अब अगर उस दूसरे शरीर जो की पिछले जनम का था उसने पाप किये तो बेहेन्चोद इस शरीर को क्यों सजा मिल रही है, शरीर तो दूसरा था जिसने गंदे कर्म किये, तुम सब चूतिये हो जो औरों के कहने पे आ गए हो, ये वोही  ब्राम्हण मादरचोद है जिसने की वेद पुराणों और गीता को tamper (modify बदल दिया है ) कर दिया है , इन लोगो ने अपनी सुविधा देखते हुए सरे साहित्यों को tamper कर दिया है, और अपने आप को सबसे ऊपर की श्रेणी में रख लिया है|  आच्छा एक और combination  लेते हैं – शरीर में आत्मा रहती है, अगर शरीर ने नहीं किया तो आत्मा ने बुरे कर्म किये पिछले जन्म में , तो बेहेन्चोद आत्मा की माँ चुदनी चाहिए न की शरीर की| सारे concept जो हिन्दुओं की किताबो में है वो सब crap (टट्टी) है | Darwin  बेटिचोद ने सही statement  दिया – “दुनिया में ताकतवर species  ही survive (जिन्दा रह सकती है) कर सकती है”| लेकिन darwin  चूतिये को एक और statement  देना था की – “within  species  the wise  can  survive  well  (वो ही समान रूपी जीव अच्छी जिंदगी बिता सकता है जो बुद्धिजीवी है , और वोही कम बुद्धि वालों पे राज करेगा )”
शायद इसलिए डायनासोर मनुष्यों की बुद्धि के आगे ख़त्म हो गए |  पर कम बुद्धि वाला मनुष्य कमजोर हो गया और सताया जाने लगा|

About looosser

I m a life long looser, my birth is for getting fu@ked by others, and to accept all kinda humiliation. Since my birth i m striving a lot to overcome humiliation, stupidity , dumb ass, moroness. I talked to a astrologer, he told me that I will be getting something only if i put effort more than a avg. person does, I have to strive more as compared to avg. men, I will not be able to enjoy my life to live it fully because of the grief, pain and disappointment of failed efforts, I have to put more efforts than a usual men does to achieve something in life. and there will always be a delay in small successes. Now I m fed up with those huge delays and I have accepted that I m in this world to suffer a lot, even i haven't done anything wrong, or wrong to anyone. I m all f@c-ked up. I need to release my body as it is causing much of pain, specially the mental stress.
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